निर्जला एकादशी के दिन गलती से पी लिया पानी? तो इस तरह करें व्रत को पूरा!

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निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म में सबसे कठिन और पुण्यदायी एकादशियों में से एक माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और बिना जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. हालांकि, कई बार अनजाने में या भूलवश व्रत के दौरान पानी पी लिया जाता है. ऐसे में आइए जानते है कि अगर गलती से व्रत टूट जाए तब क्या करना चाहिए?

हिंदू धर्म में साल भर में आने वाली सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माना गया है. जैसा कि इसके नाम से ही साफ है, इस व्रत में अन्न के साथ-साथ जल का त्याग भी करना होता है. ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में बिना पानी के व्रत रखना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि भूलवश या आदत के कारण मुंह में पानी चला जाता है या इंसान गलती से पानी पी लेता है. अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो बिल्कुल भी घबराएं नहीं. शास्त्रों में अनजाने में हुई ऐसी भूल के लिए बहुत ही सरल नियम और प्रायश्चित के उपाय बताए गए हैं, जिससे आपका व्रत खंडित नहीं होता और उसका पुण्य फल भी बरकरार रहता है. आइए जानते हैं कि इस स्थिति में आपको क्या करना चाहिए और इस साल निर्जला एकादशी की सही तिथि क्या है.

कब है निर्जला एकादशी 2026?

द्रिक पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून 2026 को शाम 6 बजकर 12 मिनट पर होगी. यह तिथि 25 जून 2026 को रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा. इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व माना गया है.

गलती से पानी पी लेने पर क्या होता है?

निर्जला एकादशी का मुख्य संकल्प पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने का होता है. इसलिए यदि किसी ने इस दिन पानी पी लिया, तो निर्जल व्रत का संकल्प तो भंग माना जाता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा एकादशी व्रत टूट गया. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि गलती जानबूझकर नहीं हुई है, तो एकादशी उपवास का पुण्य पूरी तरह समाप्त नहीं होता. क्योंकि श्रद्धा और भक्ति को भगवान सबसे अधिक महत्व देते हैं.

भगवान विष्णु से मांगें क्षमा

यदि निर्जला एकादशी के दिन भूलवश पानी पी लिया है, तो सबसे पहले भगवान विष्णु के सामने हाथ जोड़कर अपनी गलती स्वीकार करें और क्षमा याचना करें. इस दौरान श्रद्धापूर्वक ॐ नमो भगवते वासुदेव मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है.

प्रायश्चित के रूप में करें दान

धार्मिक परंपराओं में गलती के प्रायश्चित के लिए दान का विशेष महत्व बताया गया है. यदि निर्जला व्रत के दौरान पानी पी लिया गया हो, तो इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जल से जुड़ी चीजों का दान करना शुभ माना जाता है. आप पानी से भरा घड़ा, तरबूज, पंखा, छाता या पीले कपड़े का दान कर सकते हैं. गर्मी के मौसम में जलदान को विशेष पुण्यदायक माना गया है.

व्रत को बीच में न छोड़ें

कई लोग पानी पी लेने के बाद यह सोचकर व्रत छोड़ देते हैं कि अब इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा. लेकिन धार्मिक दृष्टि से ऐसा करना उचित नहीं माना जाता. यदि पानी पी लिया है, तब भी भगवान विष्णु का स्मरण करें और व्रत के नियमों का पालन जारी रखें तो व्रत का फल मिलता है.

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