पूर्वांचल में “बाहुबली” नाम से मशहूर बृजेश सिंह उत्तर प्रदेश की अपराध और राजनीति की दुनिया का बड़ा नाम रहे हैं। उनका असली नाम अरुण कुमार सिंह बताया जाता है। वे खास तौर पर वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और आसपास के इलाकों में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले माफिया-डॉन और बाद में राजनीति में सक्रिय नेता के रूप में जाने गए।
शुरुआती जीवन कैसा था?
बृजेश सिंह का जन्म वाराणसी जिले के एक राजपूत परिवार में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई-लिखाई सामान्य तरीके से हुई और बताया जाता है कि वे पढ़ाई में भी ठीक माने जाते थे। लेकिन परिवार से जुड़े एक हत्या कांड और गैंगवार के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया।
कहा जाता है कि 1980 के दशक में उनके परिवार पर हमला हुआ था, जिसके बाद वे अपराध की दुनिया में उतर गए। धीरे-धीरे उन्होंने पूर्वांचल में अपना गैंग खड़ा कर लिया।
अपराध की दुनिया में कैसे बढ़े?
1990 के दशक तक बृजेश सिंह पूर्वांचल के बड़े बाहुबलियों में गिने जाने लगे।
उनका नाम:
रंगदारी,
ठेकेदारी,
गैंगवार,
हत्या,
अवैध वसूली
जैसे मामलों में आने लगा।
उनकी सबसे बड़ी दुश्मनी माफिया मुख्तार अंसारी गैंग से मानी जाती थी। पूर्वांचल में दोनों गैंगों के बीच लंबे समय तक संघर्ष चलता रहा।
राजनीति में कैसे आए?
पूर्वांचल में बढ़ते प्रभाव के बाद बृजेश सिंह ने राजनीति में एंट्री की।
उन्होंने खुद को “जनता का नेता” बताकर राजनीतिक पकड़ मजबूत करनी शुरू की।
चुनाव और राजनीति
2012 में उन्हें प्रगतिशील मानव समाज पार्टी (PMSP) ने टिकट दिया था।
बाद में वे विधान परिषद यानी MLC राजनीति में सक्रिय हुए।
वाराणसी-चंदौली-भदोही क्षेत्र में उनका परिवार लंबे समय तक MLC सीट पर प्रभाव बनाए रहा।
उनकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह भी राजनीति में सक्रिय रहीं और MLC रह चुकी हैं।
बृजेश सिंह से जुड़े बड़े विवाद
1. मुख्तार अंसारी गैंग से दुश्मनी
यह उनकी सबसे चर्चित गैंगवार मानी जाती है।
दोनों गैंगों के बीच कई हिंसक घटनाएं हुईं।
2001 में मुख्तार अंसारी पर हमले के मामले में भी बृजेश सिंह का नाम आया था।
2. हत्या और गैंगवार के मामले
उन पर कई हत्या और आपराधिक मामलों के आरोप लगे।
पूर्वांचल के कई चर्चित हत्याकांडों में उनका नाम सामने आया।
3. लंबे समय तक फरार
रिपोर्ट्स के अनुसार वे करीब एक दशक तक फरार रहे।
बाद में 2008 में ओडिशा से उनकी गिरफ्तारी हुई थी।
4. सात लोगों की हत्या वाला मामला
चंदौली जिले में एक परिवार के सात लोगों की हत्या के मामले में भी उनका नाम आया था।
हालांकि 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया।
जेल और कानूनी लड़ाई
बृजेश सिंह करीब 14 साल तक अलग-अलग मामलों में जेल में रहे।
2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वे वाराणसी जेल से बाहर आए।
उनकी रिहाई पूर्वांचल की राजनीति में बड़ी खबर बनी थी।
मौजूदा हालात में उनकी स्थिति कैसी है?
2026 तक:
बृजेश सिंह पहले जैसी सक्रिय आपराधिक भूमिका में नहीं दिखते।
उनका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव अभी भी पूर्वांचल के कुछ इलाकों में माना जाता है।
उनका परिवार अब भी स्थानीय राजनीति में सक्रिय है।
यूपी सरकार की माफिया विरोधी कार्रवाई और बदलते राजनीतिक माहौल के कारण उनका पुराना दबदबा काफी कमजोर माना जाता है।
हालांकि पूर्वांचल की राजनीति में उनका नाम आज भी बड़े बाहुबली नेताओं में लिया जाता है।बाहुबली बृजेश

