सामान्य परिवार से उठकर कैसे हासिल किया UP सरकार में मंत्री पद? जाने ओपी राजभर की पूरी कहानी

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admin
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में ओम प्रकाश राजभर यानी ओपी राजभर आज भले ही बड़ा नाम बन चुके हों, लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। कई बार चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे पूर्वांचल की राजनीति में अपनी अलग पहचान बना ली। बहुजन समाज पार्टी से राजनीति शुरू करने वाले ओपी राजभर ने बाद में अपनी अलग पार्टी बनाई और राजभर समाज के बड़े नेता बनकर उभरे। 1991 और 1996 में चुनाव हारने से लेकर 2017 और 2022 में बड़ी जीत हासिल करने तक उनका राजनीतिक सफर लगातार संघर्ष और उतार-चढ़ाव से भरा रहा। आज वे योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और पूर्वांचल की राजनीति में मजबूत प्रभाव रखते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि ओपी राजभर ने अब तक कितनी बार चुनाव लड़ा, कितनी बार हार का सामना किया और कब-कब जीत हासिल की।

शुरुआती जीवन कैसा था?

ओम प्रकाश राजभर का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में एक साधारण राजभर परिवार में हुआ था। उनका बचपन आर्थिक तंगी और ग्रामीण माहौल में बीता।

उन्होंने शुरुआती पढ़ाई गांव में ही की। बाद में वे सामाजिक आंदोलनों और पिछड़े वर्ग की राजनीति से जुड़ गए। धीरे-धीरे उन्होंने राजभर समाज को संगठित करना शुरू किया और यहीं से उनकी राजनीतिक पहचान बनने लगी।

राजनीति में शुरुआत कैसे हुई?

ओपी राजभर ने शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (BSP) से की थी।
वे लंबे समय तक कांशीराम और मायावती की राजनीति से जुड़े रहे।

लेकिन बाद में उन्होंने महसूस किया कि राजभर समाज को अलग राजनीतिक पहचान की जरूरत है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाने का फैसला किया।

पार्टी कब बनाई?

ओम प्रकाश राजभर ने साल 2002 में:

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP)

की स्थापना की थी।

पार्टी का नाम राजा सुहेलदेव के नाम पर रखा गया।
इस पार्टी का मुख्य आधार:

राजभर समाज,
पिछड़ा वर्ग,
गरीब और ग्रामीण वोट बैंक

रहा है।

आज SBSP पूर्वांचल की एक प्रभावशाली क्षेत्रीय पार्टी मानी जाती है।

पहली बार चुनाव कब लड़े?

ओपी राजभर ने 1990 के दशक में सक्रिय राजनीति शुरू की थी, लेकिन उन्हें शुरुआती चुनावों में ज्यादा सफलता नहीं मिली।

वे कई बार विधानसभा चुनाव लड़े लेकिन लंबे समय तक जीत हासिल नहीं कर पाए।

कितनी बार चुनाव हारे?

ओपी राजभर ने अपने राजनीतिक करियर में कई चुनाव हारे हैं।
शुरुआती दौर में उनकी पार्टी छोटी थी और संगठन कमजोर माना जाता था।

हालांकि 2017 विधानसभा चुनाव के बाद उनकी राजनीति में बड़ा बदलाव आया।

महत्वपूर्ण बात:
वे खुद कई बार चुनाव हार चुके हैं,
लेकिन गठबंधन राजनीति के कारण हमेशा सत्ता के करीब बने रहे।

2022 के बाद घोसी सीट पर राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद उनका प्रभाव बना रहा।

पहली बड़ी सफलता कब मिली?

2017 विधानसभा चुनाव में SBSP ने भाजपा के साथ गठबंधन किया।
इस चुनाव में पार्टी ने कई सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया और ओपी राजभर योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री बने।

यहीं से उनकी पहचान पूरे उत्तर प्रदेश में मजबूत हुई।

भाजपा और सपा दोनों के साथ राजनीति

ओपी राजभर की राजनीति गठबंधन बदलने को लेकर भी चर्चा में रही है।

वे:

कभी भाजपा के साथ रहे,
फिर समाजवादी पार्टी गठबंधन में गए,
और बाद में दोबारा NDA में लौट आए।

उनकी राजनीति को “किंगमेकर राजनीति” भी कहा जाता है।

मंत्री रहते हुए क्या काम किए?

योगी सरकार में मंत्री रहते हुए ओपी राजभर ने:

पिछड़े वर्ग के मुद्दे,
पंचायत चुनाव,
गरीब वर्ग के अधिकार,
आरक्षण,
ग्रामीण विकास

जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया।

वे अक्सर पंचायत चुनाव और पिछड़े समाज की हिस्सेदारी को लेकर बयान देते रहे हैं।

पंचायत चुनाव को लेकर क्या कहा?

हाल के दिनों में उन्होंने कहा कि:

पंचायत चुनाव कोर्ट के आदेश के अनुसार होंगे,
और उनकी पार्टी पंचायत चुनाव अकेले लड़ सकती है।
उनसे जुड़े बड़े विवाद
1. भाजपा पर हमला

भाजपा सरकार में रहते हुए भी वे कई बार अपनी ही सरकार पर सवाल उठाते रहे।

2. गठबंधन बदलना

वे कई बार राजनीतिक गठबंधन बदल चुके हैं, जिस कारण विपक्ष उन्हें “मौकापरस्त नेता” कहता रहा है।

3. बयानबाजी

ओपी राजभर अपने तीखे बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं।
वे अक्सर:

अखिलेश यादव,
मायावती,
भाजपा,
और विपक्षी नेताओं

पर खुलकर बयान देते हैं।

मौजूदा राजनीतिक स्थिति कैसी है?

2026 तक:

ओपी राजभर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं,
SBSP NDA गठबंधन का हिस्सा है,
और वे 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हैं।

उन्होंने दावा किया है कि उनकी पार्टी यूपी की 62 सीटों पर मजबूत स्थिति में है।

राजनीतिक प्रभाव

ओपी राजभर का सबसे ज्यादा प्रभाव:

गाजीपुर,
मऊ,
बलिया,
आजमगढ़,
और पूर्वांचल के कई जिलों

में माना जाता है।

राजभर समाज के बीच उनकी मजबूत पकड़ आज भी उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती ह

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