जनगणना 2027 के पहले चरण में उत्तर प्रदेश में लगभग छह करोड़ मकानों की गणना पूरी हो गई है।
देश की सबसे अधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश एक बार फिर नए जनसंख्या रिकार्ड की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। जनगणना-2027 के पहले चरण में प्रदेश के करीब छह करोड़ मकानों की गणना पूरी हो गई है।
मकानों की संख्या और जनसंख्या वृद्धि के पिछले रुझानों को देखते हुए प्रदेश की आबादी 25 करोड़ का आंकड़ा पार करने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि वास्तविक आबादी का पता अगले वर्ष होने वाली व्यक्तिगत और जातीय गणना के बाद ही चलेगा।
प्रदेश में जनगणना-2027 के पहले चरण का काम शत-प्रतिशत पूरा हो गया है। इस चरण में सात मई से 21 मई तक नागरिकों को स्वगणना का अवसर दिया गया था, जबकि 22 मई से 20 जून तक कर्मचारियों ने घर-घर जाकर मकानों की गणना की। इसमें प्रदेश भर में करीब पांच लाख कर्मचारियों की तैनाती की गई थी।
मकान गणना के दौरान प्रत्येक घर से 33 प्रश्नों के माध्यम से जानकारी जुटाई गई। इसमें मकान की स्थिति, निर्माण की प्रकृति, उपलब्ध सुविधाएं, परिवार से जुड़ी मूलभूत जानकारियां और घरों में उपयोग होने वाले प्रमुख ईंधन व अन्य सुविधाओं का विवरण शामिल किया गया।
प्रदेश के सभी 75 जिलों में 350 तहसील, 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद, 545 नगर पंचायत, 13 छावनी परिषद और आठ औद्योगिक टाउनशिप को मिलाकर कुल 1195 चार्ज क्षेत्र बनाए गए।
इन क्षेत्रों के करीब 1.04 लाख गांवों और 14,983 वार्डों में स्थित 3,90,717 मकान सूचीकरण ब्लाकों में गणना का कार्य पूरा किया गया।
करीब छह करोड़ मकानों की गणना के आधार पर यदि एक परिवार में औसतन पांच सदस्यों का अनुमान लगाया जाए तो आबादी 30 करोड़ तक पहुंचने की संभावना बनती है। हालांकि यह केवल गणितीय अनुमान है।
जनसंख्या वृद्धि की पिछली प्रवृत्तियों और विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार प्रदेश की वास्तविक आबादी 25 करोड़ से अधिक और करीब 28 करोड़ के आसपास रहने की संभावना जताई जा रही है।
जनगणना का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण अगले वर्ष फरवरी से शुरू होगा। इस चरण में प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी के साथ जातीय विवरण भी दर्ज किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद जनगणना-2027 के आधिकारिक आंकड़े तैयार होंगे, जिनके अगले वर्ष मार्च तक जारी होने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी, तब प्रदेश की आबादी 19 करोड़ 98 लाख 12 हजार 341 दर्ज की गई थी। सामान्य तौर पर देश में हर 10 वर्ष में जनगणना कराई जाती है। इसलिए अगली जनगणना 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसमें देरी हुई और अब यह प्रक्रिया 2026-27 में पूरी की जा रही है।
हर दशक बढ़ता गया प्रदेश का जनसंख्या आकार
पिछले एक शताब्दी में उत्तर प्रदेश की आबादी लगातार बढ़ती रही है। वर्ष 1901 में प्रदेश की आबादी लगभग 4.66 करोड़ थी, जो 2011 तक बढ़कर करीब 20 करोड़ पहुंच गई।
पिछले कई दशकों में हर दस वर्ष में आबादी में लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। अब जनगणना-2027 के अंतिम आंकड़े तय करेंगे कि जनसंख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश विकास, संसाधनों और भविष्य की योजनाओं के लिए किस नए पड़ाव पर पहुंचता है।

