मुजफ्फरपुर में किराना दुकानदार की बेटी बनी DSP

We are just an advanced breed of monkeys on a minor planet of a very average star. But we can understand the Universe. That makes us something very special.

admin
3 Min Read

मुजफ्फरपुर में किराना दुकानदार की बेटी बनी DSP… कोचिंग के लिए भी नहीं थे पैसे, बिटिया ने BPSC में लगाई हैट्रिक, हैरान कर देगी Success Story

Jaya Kumari Success Story: मुजफ्फरपुर की जया कुमारी ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 934वीं रैंक लाकर डीएसपी का पद हासिल किया है. बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली जया के पिता किराना दुकानदार हैं. आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर टेस्ट सीरीज के पैसे जुटाए और बीपीएससी में लगातार तीसरी जीत हासिल कर सफलता की हैट्रिक लगाई.

हौसले बुलंद हों और इरादे मजबूत, तो सीमित साधन भी कामयाबी का रास्ता नहीं रोक सकते. बिहार के मुजफ्फरपुर की बेटी जया कुमारी ने इस बात को सच कर दिखाया है. एक बेहद साधारण परिवार से आने वाली जया ने 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा में डीएसपी (DSP) का पद हासिल कर इतिहास रच दिया है. खास बात यह है कि बिहार लोक सेवा आयोग की इस प्रतिष्ठित परीक्षा में यह उनकी लगातार तीसरी सफलता है, जिसके साथ उन्होंने कामयाबी की अनोखी हैट्रिक पूरी कर ली है.

मुजफ्फरपुर के गोबरसाही इलाके की रहने वाली जया कुमारी का सफरनामा बेहद प्रेरणादायक है. उनके पिता सुनील कुमार एक छोटी सी किराना दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि मां दुर्गा रानी गृहिणी हैं. जया ने 12वीं तक की पढ़ाई मुजफ्फरपुर से ही पूरी की. इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली का रुख किया और जेएनयू (JNU) से अपनी मास्टर्स डिग्री पूरी की.

 

आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उनके पास किसी बड़े कोचिंग संस्थान में दाखिला लेने के पैसे नहीं थे. लेकिन जया ने हार नहीं मानी. उन्होंने दिल्ली में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और उससे मिले पैसों से अपनी पढ़ाई और टेस्ट सीरीज का खर्च जुटाया. इस परीक्षा में उन्हें ईडब्ल्यूएस (EWS) कैटेगरी में 934वीं रैंक हासिल हुई है.

सफलता की अद्भुत हैट्रिक

जया कुमारी इससे पहले भी दो बार बीपीएससी की परीक्षा क्रैक कर चुकी हैं. सबसे पहले उन्होंने 67वीं परीक्षा पास की, जहां उन्हें राजस्व अधिकारी (Revenue Officer) का पद मिला, लेकिन उन्होंने इसमें ज्वाइन नहीं किया. उन्होंने फिर परीक्षा दी और असिस्टेंट डायरेक्टर (Assistant Director Cadre – Disability Department) के पद पर चुनी गईं. वर्तमान में वह इसी पद पर सीतामढ़ी में कार्यरत थीं. अपनी कमियों को सुधारते हुए उन्होंने तीसरी बार परीक्षा दी और अब सीधे डीएसपी (DSP) का पद हासिल कर अपना सपना पूरा किया.

Share This Article
Leave a Comment